EU AI कानून: क्या आपको AI जनित छवियों को लेबल करना होगा?
EU AI कानून की पारदर्शिता शर्तें 2 अगस्त 2026 से लागू हैं — और इनकी पहुँच यूरोप के बाहर की कंपनियों तक भी है। किसे लेबल लगाना है, किन छवियों पर, और पूरी media library को एक क्लिक में कैसे निपटाएँ।
आप यूरोप में नहीं हैं। तो क्या यह नियम फिर भी आप पर लागू होता है?
हो सकता है। अगर आपकी वेबसाइट यूरोपीय ग्राहक पढ़ते हैं, अगर आपका होटल या रेस्टोरेंट यूरोप से आने वाले पर्यटकों को सर्व करता है, अगर आप ecommerce या marketplace के ज़रिए EU में बेचते हैं, या अगर आप एक agency, IT services कंपनी या web-design स्टूडियो हैं जो यूरोपीय क्लाइंट्स के लिए साइट और इमेजरी बनाती है — तो जवाब अपने आप "नहीं" नहीं रह जाता। वह बन जाता है "निर्भर करता है, और पाँच मिनट पढ़ने लायक है।"
वजह सीधी है और कानून में ही लिखी है: यूरोपीय संघ का AI कानून सिर्फ़ EU में स्थापित कंपनियों तक सीमित नहीं है। यह उन प्रदाताओं और उपयोगकर्ता व्यवसायों तक भी पहुँचता है जिनके AI सिस्टम का आउटपुट यूरोपीय संघ के भीतर इस्तेमाल होता है । आपकी साइट पर लगी एक AI जनित तस्वीर, जिसे बर्लिन, पेरिस या एम्स्टर्डम में बैठा कोई ग्राहक देख रहा है — यह बिल्कुल वही स्थिति है।
यह गाइड तीन सवालों का जवाब इसी क्रम में देती है: क्या यह आप पर लागू होता है? अगर हाँ, तो आपकी ज़िम्मेदारी वास्तव में क्या है — और क्या निश्चित रूप से नहीं है? और इसे व्यावहारिक रूप से कैसे निपटाया जाए, बिना पूरा हफ़्ता एक-एक इमेज एडिट किए।
शुरू करने से पहले एक बात: यह सामग्री व्यावहारिक मार्गदर्शन है, कानूनी सलाह नहीं । आपकी विशिष्ट स्थिति पर बाध्यकारी राय के लिए किसी योग्य वकील से बात करें।
और एक ज़रूरी दायरा: यह लेख केवल यूरोपीय नियम के बारे में है। भारत अपने स्तर पर AI से जुड़े नियम और ढाँचे विकसित कर रहा है, और वह विषय अलग है — नीचे लिखी किसी भी बात को भारतीय नियमों का विवरण न समझें।
TL;DR — छोटा जवाब
2 अगस्त 2026से EU AI कानून के अनुच्छेद 50 (Article 50) की पारदर्शिता शर्तें लागू हैं।
कानून यूरोप के बाहर की कंपनियों तक भी पहुँचता है, जब AI सिस्टम का आउटपुट EU के भीतर इस्तेमाल होता है। यूरोपीय ग्राहकों को सर्व करती वेबसाइट, EU में निर्यात करता स्टोर, या यूरोपीय क्लाइंट वाली agency — सब संभावित दायरे में हैं।
दो अलग-अलग कर्तव्य हैं।प्रदाता (provider)— यानी जिसने AI टूल बनाया — को आउटपुट पर machine-readable निशान लगाना है। डिप्लॉयर / उपयोगकर्ता व्यवसाय (deployer)— यानी जो इमेज पब्लिश करता है — को दिखने वाला लेबल लगाना है, लेकिन तभी जब इमेज"deepfake"की परिभाषा पर खरी उतरे।
हर AI इमेज deepfake नहीं होती। किसी वास्तविक या विश्वसनीय लगने वाले व्यक्ति, जगह, वस्तु या घटना की यथार्थवादी तस्वीर संभवतः होती है। स्पष्ट रूप से काल्पनिक या इलस्ट्रेटेड ग्राफ़िक नहीं होता।
पारदर्शिता शर्तों के उल्लंघन पर जुर्माना अधिकतम €1.5 करोड़ (15 million euro) या वैश्विक वार्षिक कारोबार का 3% तक — जो भी अधिक हो।
व्यावहारिक हल तीन चरणों का है: अपनी AI छवियों की सूची बनाएँ → दिखने वाला लेबल लगाएँ → जो किया उसका रिकॉर्ड रखें।
WordPress पर KI-Transparenz-EU AI इमेज लेबल लगाने वाला काम bulk में करता है — इमेज चुनिए, एक क्लिक कीजिए, लेबल सार्वजनिक रूप से लग जाता है। यह मुफ़्त है।
"मैं तो यूरोप में हूँ ही नहीं" — बात यहीं ख़त्म क्यों नहीं होती
यह भारत के लगभग हर बिज़नेस ओनर की पहली प्रतिक्रिया होती है, और वाजिब है। यूरोपीय कानून सुनने में यूरोप की समस्या लगता है।
लेकिन यह विनियमन जानबूझकर बाह्य-क्षेत्रीय (extraterritorial) पहुँच के साथ लिखा गया है। यह उन प्रदाताओं पर लागू होता है जो EU बाज़ार में AI सिस्टम रखते हैं, और उन प्रदाताओं व डिप्लॉयर्स पर भी जो संघ के बाहर स्थापित हैं —जब AI सिस्टम से निकला आउटपुट EU के भीतर इस्तेमाल होता है ।
आसान भाषा में: कसौटी यह नहीं है कि आपका GST रजिस्ट्रेशन कहाँ का है। कसौटी यह है कि AI का नतीजा कहाँ पहुँचकर इस्तेमाल हो रहा है।
चार भारतीय प्रोफ़ाइल जिन्हें यह ध्यान से पढ़ना चाहिए
1. Agencies, IT services कंपनियाँ, marketing और web-design फ़र्म्स जिनके क्लाइंट यूरोप में हैं।
भारत में यह सबसे बड़ा और सबसे कम चेताया गया समूह है। आप जर्मनी, नीदरलैंड्स, फ़्रांस या स्पेन के किसी ब्रांड के लिए वेबसाइट बनाते हैं, कैंपेन क्रिएटिव तैयार करते हैं, प्रोडक्ट कैटलॉग की इमेजरी बनाते हैं, या उनके ब्लॉग के लिए फ़ीचर्ड इमेज generate करते हैं। आपकी बनाई AI इमेज सीधे एक यूरोपीय चैनल पर जाकर बैठती है।
यहाँ दो अलग चीज़ें हैं और उन्हें अलग रखना ज़रूरी है — जिसका विस्तार नीचे "एजेंसी या क्लाइंट" वाले सेक्शन में है। लेकिन तत्काल व्यावसायिक बात यह है: देर-सबेर कोई यूरोपीय क्लाइंट अपनी vendor compliance प्रक्रिया में आपसे पूछेगा,"आप AI जनित कंटेंट के डिस्क्लोज़र को कैसे हैंडल करते हैं?"उस सवाल का तैयार जवाब होना केवल सावधानी नहीं, टेंडर जीतने का फ़ायदा है।
2. पर्यटन से जुड़े रेस्टोरेंट, कैफ़े, होमस्टे और होटल।
गोवा, राजस्थान, केरल, हिमाचल, ऋषिकेश — जहाँ भी यूरोपीय मेहमानों की ख़ासी संख्या आती है। अगर आपका डिजिटल मेन्यू या वेबसाइट अंग्रेज़ी (या जर्मन/फ़्रेंच) में है, अगर आप ऐसे booking platforms पर हैं जो यूरोप में बिकते हैं, तो आपकी AI से बनी डिश और प्रॉपर्टी की तस्वीरें यूरोपीय उपभोक्ता देख रहे हैं।
और यहाँ एक बारीक़ी है जो अक्सर छूट जाती है: सबसे अहम पल वह नहीं है जब मेहमान गोवा पहुँच चुका है। सबसे अहम पल वह है जब वह अभी यूरोप में बैठा है और बुकिंग का फ़ैसला कर रहा है । तब आउटपुट स्पष्ट रूप से EU के भीतर इस्तेमाल हो रहा है।
3. Ecommerce, exporters और EU में बेचने वाले marketplace sellers।
Shopify या WooCommerce स्टोर जो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग करता है; यूरोपीय marketplace पर बैठा seller; कपड़ा, हस्तशिल्प, आयुर्वेद, चाय-कॉफ़ी, ज्वेलरी या होम डेकोर का ब्रांड जो EU में निर्यात करता है। अगर आपने AI से product photos, lifestyle सीन, मॉडल शॉट्स या यथार्थवादी बैकग्राउंड बनाए हैं, तो हर बार जब कोई यूरोपीय ग्राहक वह प्रोडक्ट पेज खोलता है, वे इमेज EU में इस्तेमाल हो रही हैं।
4. SaaS और डिजिटल प्रोडक्ट कंपनियाँ जिनके यूज़र EU में हैं।
लैंडिंग पेज के hero visuals, in-app illustrations, डॉक्युमेंटेशन की स्क्रीनशॉट-नुमा तस्वीरें — अगर ये AI से बनी हैं और यथार्थवादी हैं, तो वही तर्क लागू होता है।
आप शायद कब दायरे से बाहर हैं
अगर आपका कारोबार पूरी तरह घरेलू है — कोई अंतरराष्ट्रीय बिक्री नहीं, कोई यूरोपीय क्लाइंट नहीं, कोई मायने रखने वाला विदेशी मेहमान नहीं, और साइट सिर्फ़ स्थानीय दर्शकों के लिए — तो व्यावहारिक जोखिम कम है।
फिर भी पढ़ना उपयोगी है, दो वजहों से। पहली, दुनिया भर का नियामक रुझान इसी दिशा में जा रहा है। दूसरी, AI इमेज पर लेबल लगाना वैसे भी अपने दर्शकों के साथ पारदर्शिता की अच्छी प्रथा है। लेकिन नहीं, आपको घबराने की ज़रूरत नहीं है।
2 अगस्त 2026 को क्या बदला
EU AI कानून कई वर्षों में चरणबद्ध ढंग से लागू हो रहा है।2 अगस्त 2026वह तारीख़ थी जब अनुच्छेद 50की पारदर्शिता शर्तें लागू हुईं।
अनुच्छेद 50 चार स्थितियों को कवर करता है: लोगों का chatbots से संवाद; AI जनित कंटेंट को उस रूप में चिह्नित करना; भावना पहचान और बायोमेट्रिक वर्गीकरण; और deepfakes व सार्वजनिक हित के विषयों पर AI से लिखा गया टेक्स्ट। अधिकांश वेबसाइट मालिकों के लिए सिर्फ़ इमेज और chatbot वाले हिस्से मायने रखते हैं।
दो बातें जो लगभग सब चूक जाते हैं:
यह सिर्फ़ यूरोपीय कंपनियों के लिए नहीं है। ऊपर समझा चुके हैं, पर दोहरा रहे हैं क्योंकि यही सबसे आम ग़लतफ़हमी है: पहुँच आउटपुट से तय होती है, पते से नहीं।
आपके हिस्से के कर्तव्य पर कोई अतिरिक्त मोहलत नहीं है। एक सीमित छूट ज़रूर है: मई 2026 के AI Omnibus समझौते के तहत, जो generative AI सिस्टम 2 अगस्त 2026 से पहले ही बाज़ार में थे, उन्हें machine-readable marking की शर्त पूरी करने के लिए2 दिसंबर 2026तक का समय मिला है। लेकिन यह छूट AI सिस्टम के प्रदाताओं के लिए है, आपके लिए नहीं। कंटेंट पब्लिश करने वाले व्यवसाय पर दिखने वाले डिस्क्लोज़र का कर्तव्य अभी से लागू है।
प्रदाता या डिप्लॉयर — वह अंतर जो लगभग हर गाइड गड़बड़ कर देती है
यही पूरे विषय का दिल है, और यहीं ज़्यादातर सामग्री — हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों में — लड़खड़ा जाती है।
प्रदाता (provider) = जिसने AI टूल बनाया
प्रदाता वह है जो AI सिस्टम विकसित करता है और उसे बाज़ार में रखता है: OpenAI, Adobe (Firefly), Midjourney, Google, Stability, इत्यादि।
अनुच्छेद 50(2) के तहत प्रदाता को यह सुनिश्चित करना है कि उसका जनित आउटपुट machine-readable फ़ॉर्मैट में चिह्नित हो और कृत्रिम रूप से जनित के रूप में पहचाना जा सके । व्यवहार में इसका मतलब है: अदृश्य watermark और हस्ताक्षरित provenance metadata, जो जनरेशन के समय ही फ़ाइल में बैठ जाते हैं। कानून कहता है कि ये समाधान तकनीकी रूप से जितना संभव हो, प्रभावी, interoperable, मज़बूत और भरोसेमंद होने चाहिए।
डिप्लॉयर / उपयोगकर्ता व्यवसाय (deployer) = जो इमेज पब्लिश करता है
डिप्लॉयर वह है जो अपनी व्यावसायिक गतिविधि में AI सिस्टम का इस्तेमाल करता है — यानी आप, जब आप एक इमेज generate करके अपनी वेबसाइट, अपने मेन्यू या अपने स्टोर पर लगाते हैं।
अनुच्छेद 50(4) के तहत, जो डिप्लॉयर AI से ऐसी इमेज, ऑडियो या वीडियो सामग्री बनाता या बदलता है जो deepfake की श्रेणी में आती है, उसे यह ज़ाहिर करना होगा कि सामग्री कृत्रिम रूप से जनित या परिवर्तित है ।
शब्दावली पर एक नोट, क्योंकि हिन्दी में यहाँ भ्रम होता है: deployer का कोई प्रचलित हिन्दी शब्द नहीं है, और गढ़े हुए अनुवाद उल्टा भ्रम बढ़ाते हैं। सबसे साफ़ तरीक़ा यह है कि इसे"उपयोगकर्ता व्यवसाय"पढ़ें — वह कंपनी जो टूल को अपने कारोबार में लगाती है। इसे "उपभोक्ता" वाले अर्थ में "यूज़र" न समझें: कोई व्यक्ति निजी शौक़ के लिए AI इमेज बना रहा हो, वह डिप्लॉयर नहीं है।
व्यवहार में यह अंतर क्यों मायने रखता है
आप प्रदाता का कर्तव्य पूरा कर ही नहीं सकते, और आपको करना भी नहीं है। किसी दूसरी कंपनी के मॉडल के आउटपुट में आप पीछे से cryptographic watermark नहीं डाल सकते। अगर कोई गाइड — या कोई software vendor — आपसे कह रहा है कि आपकी कंपनी को "अपनी AI इमेज पर machine-readable watermark लगाना होगा", तो उसने दोनों भूमिकाएँ गड्डमड्ड कर दी हैं।
आपका काम इंसान को दिखने वाला लेबल है। बस इतना — और यह हिस्सा पूरी तरह आपके नियंत्रण में है।
एजेंसी या क्लाइंट: लेबल आख़िर कौन लगाएगा?
यह भारतीय services इंडस्ट्री का असली सवाल है, और इसका जवाब देने लायक है।
कानूनी सिद्धांत सीधा है: दिखने वाले डिस्क्लोज़र का कर्तव्य उस पर पड़ता है जो अपने व्यावसायिक संदर्भ में उस कंटेंट को deploy करके पब्लिश करता है। अगर इमेज आपके यूरोपीय क्लाइंट की वेबसाइट पर, उसके ब्रांड के तहत, उसके नियंत्रण में छपती है — तो व्यावहारिक रूप से वह क्लाइंट उस प्रकाशन का डिप्लॉयर है, और लेबल उसकी साइट पर दिखना चाहिए।
लेकिन यह आपको बरी नहीं करता, तीन कारणों से:
1. आप अकेले जानते हैं कि कौन-सी इमेज AI से बनी है। क्लाइंट को 60 इमेज की एक ZIP फ़ाइल मिलती है। उसे पता नहीं कि उनमें से 14 Midjourney से बनीं, 9 real photos हैं और 37 stock हैं। अगर आप नहीं बताएँगे, तो कोई नहीं बताएगा — और वर्गीकरण ही पूरे काम का आधार है।
2. अगर आप ख़ुद क्लाइंट की साइट चलाते हैं, तो व्यावहारिक रूप से आप ही पब्लिश कर रहे हैं। भारत की बहुत सी agencies retainer पर क्लाइंट का WordPress संभालती हैं — पोस्ट डालना, इमेज अपलोड करना, पेज अपडेट करना। ऐसे में "पब्लिश करने वाला कौन है" का जवाब कागज़ पर क्लाइंट है, पर हाथ आपके हैं। लेबल लगाना आपके workflow का हिस्सा है, चाहे कर्तव्य कागज़ पर किसी का भी हो।
3. यह अनुबंध और प्रतिष्ठा का मामला है। अगर क्लाइंट पर सवाल उठा और पता चला कि उसकी agency ने बिना बताए AI इमेज दीं, तो रिश्ता वहीं ख़त्म होता है — जुर्माने का इंतज़ार किए बिना।
स्वस्थ प्रथा क्या है — चार बिंदु:
Delivery note में AI इमेज अलग से चिह्नित करें। हर हैंडओवर के साथ एक छोटी सूची: कौन-सी फ़ाइल AI से बनी, किस टूल से, किस तारीख़ को। एक spreadsheet पर्याप्त है।
अनुबंध में एक clause डालें। एक-दो वाक्य: agency AI जनित सामग्री की पहचान बताएगी; क्लाइंट प्रकाशन पर दिखने वाला डिस्क्लोज़र लगाएगा; अगर agency ही पब्लिश करती है तो वह अपने ब्रांड-स्टाइल के अनुसार लेबल लगाएगी।
टेम्पलेट में लेबल डिफ़ॉल्ट बनाएँ। जो थीम या component library आप क्लाइंट को देते हैं, उसमें image component के भीतर एक
isAIGeneratedफ़्लैग और उसका caption रेंडर पहले से मौजूद हो। एक बार बनाइए, हर प्रोजेक्ट में मुफ़्त मिलेगा।इसे अपनी pitch में बताइए।"हम AI इमेज का डिस्क्लोज़र लेबल process के हिस्से के रूप में देते हैं" — यूरोपीय procurement टीम के सामने यह वाक्य आपको दूसरे vendors से अलग कर देता है।
एक स्पष्ट चेतावनी: यह ऊपर लिखा सब कर्तव्य का व्यावहारिक बँटवारा है, कानूनी राय नहीं। अगर आपका अनुबंध बड़ा है या क्लाइंट regulated सेक्टर में है, तो यह clause किसी वकील से लिखवाइए।
क्या आपकी इमेज "deepfake" है? असली टेस्ट
"Deepfake" सुनकर नकली सेलिब्रिटी वीडियो और चुनावी फ़र्ज़ीवाड़ा याद आता है। AI कानून में यह शब्द कहीं ज़्यादा व्यापक है, और यहीं लोग फिसलते हैं।
परिभाषा उस AI जनित या AI से परिवर्तित इमेज, ऑडियो या वीडियो सामग्री को कवर करती है जो मौजूदा या यथार्थवादी रूप से संभाव्य व्यक्तियों, वस्तुओं, स्थानों, संस्थाओं या घटनाओं से मिलती-जुलती हो, और जो किसी व्यक्ति को ग़लत ढंग से प्रामाणिक या सच्ची प्रतीत हो सकती हो ।
इससे दो नतीजे निकलते हैं, और दोनों लोगों को चौंकाते हैं:
धोखा देने की मंशा ज़रूरी नहीं है। आपको किसी को गुमराह करने की कोशिश नहीं करनी पड़ती। अगर इमेज असली लगती है और किसी संभाव्य चीज़ को दिखाती है, तो वह दायरे में आ सकती है।
"वस्तुएँ, स्थान और घटनाएँ" भी शामिल हैं, सिर्फ़ लोग नहीं। यही कारण है कि यह नियम रोज़मर्रा की व्यावसायिक इमेजरी तक पहुँचता है — होटल के कमरे की AI तस्वीर, मेज़ पर रखे प्रोडक्ट की, दफ़्तर की, या खाने की थाली की — भले ही उसमें कोई इंसान न हो।
क्या बाहर रहता है
स्पष्ट रूप से काल्पनिक या भौतिक रूप से असंभव सामग्री— ड्रैगन, बिना उपकरण उड़ते लोग, साफ़-साफ़ अतियथार्थवादी दृश्य। कोई इन्हें प्रामाणिक नहीं मानेगा, इसलिए ये deepfake नहीं हैं।
साफ़ दिखने वाली illustration और stylised ग्राफ़िक्स— कार्टून, डायग्राम, अमूर्त कला, ज़ाहिर तौर पर कृत्रिम 3D renders।
स्पष्ट रूप से कलात्मक, रचनात्मक, व्यंग्यात्मक या काल्पनिक संदर्भ वाली सामग्री के साथ नरमी बरती जाती है, हालाँकि उपयुक्त तरीक़े से पारदर्शिता तब भी अपेक्षित है।
एक वाक्य का व्यावहारिक टेस्ट
क्या एक आम विज़िटर, इस इमेज पर सरसरी नज़र डालकर, यह मान लेगा कि इसे कैमरे से खींचा गया है?
हाँ → दायरे में मानिए। लेबल लगाइए।
नहीं, यह साफ़ तौर पर बनाई हुई, rendered या असंभव है → बहुत संभावना है कि यह बाहर है।
यह टेस्ट याद रखिए। यह 90% मामले बिना दोबारा कानून पढ़े हल कर देता है।
कब आप बिल्कुल भी कवर नहीं हैं
अगर आप AI से बनी या AI से बदली गई दृश्य सामग्री पब्लिश ही नहीं करते, तो अनुच्छेद 50 के इमेज नियम आप पर लागू नहीं होते। असली फ़ोटोग्राफ़ी, इंसानों द्वारा खींची गई stock तस्वीरें और आपके अपने बनाए illustrations इसे ट्रिगर नहीं करते।
सामान्य एडिटिंग भी असली फ़ोटो को deepfake नहीं बना देती: कानून ऐसी मानक एडिटिंग को ध्यान में रखता है जो मूल सामग्री की वास्तविकता को पर्याप्त रूप से नहीं बदलती। अपने असली प्रतिष्ठान की असली तस्वीर को crop करना, colour grade करना या retouch करना निशाना नहीं है। Generative fill से ऐसी इमारत जोड़ देना जो वहाँ कभी थी ही नहीं — यह दूसरी बात है।
कानून आपसे असल में क्या माँगता है
आपका कर्तव्य: दिखने वाला, समझ में आने वाला डिस्क्लोज़र
Deepfake की परिभाषा में आने वाली छवियों के लिए डिस्क्लोज़र ऐसा होना चाहिए जिसे कोई व्यक्ति किसी detection टूल के बिना देख सके। व्यवहार में इसका मतलब है दिखने वाला लेबल — caption, badge, overlay या स्पष्ट रूप से जुड़ा नोट — जो वहीं मौजूद हो जहाँ इमेज सामने आती है।
तीन व्यावहारिक गुण:
वहीं दिखे जहाँ इमेज है। Privacy policy में दबी एक सामान्य पंक्ति काम नहीं करती। डिस्क्लोज़र को इमेज के साथ चलना चाहिए।
सरल भाषा।"AI जनित" या "AI से बनाई गई छवि" समझ आता है; कोई गूढ़ आइकन नहीं आता।
पहली नज़र में मौजूद। Hover, क्लिक या तीन स्क्रॉल के पीछे नहीं।
यूरोपीय दर्शकों को सर्व करने वालों के लिए एक अतिरिक्त बात: अगर आपकी साइट या मेन्यू बहुभाषी है, तो लेबल हर भाषा में मौजूद होना चाहिए । सिर्फ़ हिन्दी या सिर्फ़ अंग्रेज़ी में लिखा नोट उस जर्मन ग्राहक के लिए अपना काम नहीं करता जो जर्मन संस्करण पढ़ रहा है।
प्रदाता का कर्तव्य: machine-readable marking
तस्वीर पूरी करने के लिए — यह हिस्सा ऊपर, स्रोत पर निपटता है। प्रदाता machine-readable संकेत embed करते हैं, सबसे आम तौर पर C2PA मानक से: यह एक cryptographically हस्ताक्षरित रिकॉर्ड होता है कि फ़ाइल कैसे बनी और कैसे संपादित हुई, जो उसके metadata में बैठा रहता है। यह एक खुला मानक है जिसे Adobe, Microsoft, Google, BBC और AP समेत एक बड़ा औद्योगिक गठबंधन समर्थन देता है।
इसकी सीमा जानना ज़रूरी है: C2PA metadata नाज़ुक होता है। इमेज का screenshot लीजिए, उसे किसी सोशल प्लेटफ़ॉर्म पर दोबारा अपलोड कीजिए, या फ़ॉर्मैट बदल दीजिए — provenance डेटा आम तौर पर हट जाता है। ठीक इसी वजह से इंसान को दिखने वाला लेबल एक अलग शर्त के रूप में मौजूद है, और इसी वजह से यूरोपीय आयोग की Code of Practice on Transparency of AI-generated Content एक परतदार तरीक़े की बात करती है — metadata, watermarking और दिखने वाला लेबल — किसी एक तंत्र पर निर्भर रहने के बजाय।
एक और कर्तव्य जो जानने लायक है: AI जनित टेक्स्ट
अगर आप सार्वजनिक हित के विषयों पर जनता को सूचित करने के लिए AI से लिखा या AI से बदला गया टेक्स्ट प्रकाशित करते हैं, तो उसे भी ज़ाहिर करना होगा — जब तक कि किसी इंसान ने संपादकीय ज़िम्मेदारी लेकर उसकी समीक्षा न की हो, और ऐसी स्थिति में आपको बता पाना चाहिए कि वह कौन था।
अपने ही प्रोडक्ट के बारे में लिखी marketing copy निशाना नहीं है। AI से लिखा समाचार या समसामयिक विषयों का लेख है। अगर आप सार्वजनिक हित के विषयों पर automated ब्लॉग चलाते हैं, तो इसे ठीक से देखिए।
अनदेखा करने पर क्या होता है
अनुच्छेद 50 की पारदर्शिता शर्तों के उल्लंघन उस दंड श्रेणी में आते हैं जहाँ जुर्माना अधिकतम €1.5 करोड़ (15 million euro) या कुल वैश्विक वार्षिक कारोबार का 3%, जो भी अधिक हो तक जा सकता है (देखें अनुच्छेद 99)। कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि SMEs और छोटी mid-cap कंपनियों के लिए आनुपातिकता का ध्यान रखा जाना चाहिए — यानी एक छोटी कंपनी के सामने वह हेडलाइन आँकड़ा नहीं है। लेकिन "छोटा" का अर्थ "छूट प्राप्त" नहीं है।
प्रवर्तन हर सदस्य देश की राष्ट्रीय बाज़ार निगरानी प्राधिकरणों के ज़रिए होता है।
और यहाँ एक ईमानदार बात, जिसे अलार्म फैलाने वाली सामग्री छोड़ देती है: प्रवर्तन का ढाँचा अभी बन ही रहा है। मार्च 2026 तक27 में से सिर्फ़ 8सदस्य देशों ने अपना single point of contact नामित किया था — कई अगस्त 2025 की समयसीमा चूक गए। यह साफ़ कहना उससे ज़्यादा उपयोगी है कि कल ही छापा पड़ने वाला है।
अधिकांश कंपनियों के लिए निकट भविष्य का वास्तविक जोखिम किसी नियामक का अचानक ऑडिट नहीं है। यह शिकायत है — किसी प्रतिस्पर्धी, ग्राहक या activist की — आपकी साइट पर सबके सामने पड़ी एक बिना लेबल वाली इमेज को लेकर।
भारतीय कंपनियों के लिए एक दूसरी वजह जुर्माने से ज़्यादा तात्कालिक है: यूरोपीय क्लाइंट की due diligence। EU के ब्रांड अपने vendors से पूछना शुरू कर चुके हैं कि वे AI जनित कंटेंट को कैसे संभालते हैं। तैयार प्रक्रिया लेकर पहुँचना प्रतिस्पर्धा में बढ़त है।
यह पूरी तस्वीर है: सक्रिय प्रवर्तन की कम संभावना, लेकिन एक सस्ता और स्थायी समाधान उपलब्ध। इसीलिए फ़ैसला आसान है।
AI जनित छवियों को लेबल करना: चार कदम
कदम 1 — जो कुछ पब्लिश कर चुके हैं, उसकी सूची बनाइए
जो मिला ही नहीं, उस पर लेबल नहीं लग सकता। इनसे गुज़रिए:
वेबसाइट पेज — hero images, backgrounds, टीम और परिसर की तस्वीरें, सेक्शन ग्राफ़िक्स
ब्लॉग पोस्ट की featured images और भीतर के illustrations
प्रोडक्ट और मेन्यू इमेजरी
Landing pages और कैंपेन microsites
पिछले दो साल में CMS media library में जो कुछ चढ़ा
हर इमेज के लिए दर्ज कीजिए: कहाँ इस्तेमाल हुई, AI जनित है या AI से बदली गई, किस टूल ने बनाई, और लगभग कब। अगर आपकी टीम समय-समय पर छिटपुट इमेज बनाती रही है, तो अनुमान से ज़्यादा मिलेंगी।
शॉर्टकट: फ़ाइल नाम और EXIF का "Software" फ़ील्ड अक्सर generator का नाम बता देते हैं (DALL·E, Firefly, Midjourney, Stable Diffusion), और C2PA-सक्षम टूल से आई फ़ाइलों में अब भी provenance metadata हो सकता है। इससे ऑडिट का बड़ा हिस्सा तेज़ी से निपट जाता है।
कदम 2 — तय कीजिए कि आपका AI इमेज लेबल कैसा दिखेगा
एक बार तय कीजिए, फिर हर जगह वही लगाइए:
शब्द।"AI जनित" सबसे साफ़ है। "AI से बनाई गई छवि" भी उतना ही ठीक है। अंग्रेज़ी-प्रधान साइट पर "AI-generated" चलेगा। एक चुनिए और उसी पर टिके रहिए।
जगह। इमेज के ठीक नीचे caption, या इमेज के किसी कोने में छोटा badge। दोनों चलते हैं; caption डिज़ाइन के साथ ज़्यादा नरमी बरतता है।
दायरा। जो इमेज deepfake टेस्ट पास करती हैं, उन पर लेबल लगाइए। सब पर लगा देना भी अनुमत है और प्रशासनिक रूप से आसान — बस असली फ़ोटोग्राफ़ी को AI बताकर लेबल मत कीजिए, वह अपने आप में एक ग़लती है।
भाषाएँ। साइट बहुभाषी है तो लेबल हर संस्करण में जाएगा।
कदम 3 — इसे पैमाने पर लागू कीजिए
यहीं ज़्यादातर प्रोजेक्ट अटक जाते हैं। CMS में चालीस इमेज हाथ से लेबल करना एक ख़राब दोपहर है; चार सौ ऐसा प्रोजेक्ट है जिसे कोई शुरू ही नहीं करता। नीचे टूल वाला सेक्शन इसी पर है।
कदम 4 — जो किया, वह लिख लीजिए
एक छोटा आंतरिक रिकॉर्ड रखिए: ऑडिट की तारीख़, आपका लेबलिंग नियम, कौन-सी इमेज दायरे में मानी गईं, और किसने मंज़ूरी दी। इसमें दस मिनट लगते हैं, और यही "हम इसे गंभीरता से लेते हैं, यह रही हमारी प्रक्रिया" और "हमने इस बारे में सोचा ही नहीं" के बीच का फ़र्क़ है — अगर कभी किसी ने पूछा।
WordPress पर यह कैसे करें: KI-Transparenz-EU
हम ख़ुद बहुत सारी AI इमेजरी पब्लिश करते हैं, तो कदम 3 की दिक़्क़त से हमारा सीधा सामना हुआ और हमने उसके लिए एक टूल बनाया। यह मुफ़्त है।
Plugin स्थिति — 7 अगस्त 2026 को अपडेटेड। v1.0 पूरा है और आज ही मुफ़्त डाउनलोड के लिए उपलब्ध है। हमने इसे आधिकारिक WordPress.org plugin directory में भी सबमिट किया है; समीक्षा में आम तौर पर कुछ हफ़्ते लगते हैं, और मंज़ूरी वाले दिन हम यह पेज अपडेट कर देंगे।
यह करता क्या है
KI-Transparenz-EU आपकी मौजूदा WordPress media library में bulk AI लेबलिंग जोड़ता है — इमेज और वीडियो, दोनों के लिए:
एक साथ कई इमेज चुनिए— library को filter कीजिए, AI जनित इमेज select कीजिए
एक क्लिक में लेबल— डिस्क्लोज़र लग जाता है और जहाँ-जहाँ वे इमेज दिखती हैं, वहाँ सार्वजनिक रूप से दिखता है
जो पहले से पब्लिश है, उस पर भी काम करता है— कुछ दोबारा अपलोड या दोबारा बनाने की ज़रूरत नहीं
मुफ़्त, बिना अकाउंट, बिना lock-in— deactivate कीजिए और साइट पहले जैसी
फ़र्क़ जो मायने रखता है: मौजूदा टूल्स ज़्यादातर आपसे एक-एक फ़ाइल पर निशान लगवाते हैं। अगर दो साल में जमा हुई library है, तो यही तो पूरी समस्या है। यह चार सौ इमेज को उतने समय में लेबल करने के लिए बना है जितने में चार होती हैं।
यह क्या करता है — और क्या नहीं करता
सीमाओं पर सीधी बात, क्योंकि आप इसे compliance की वजह से पढ़ रहे हैं:
यह दिखने वाला, इंसान द्वारा पढ़ा जा सकने वाला डिस्क्लोज़र लगाता है— अनुच्छेद 50(4) के तहत डिप्लॉयर का कर्तव्य।
यह इमेज के pixels में cryptographic watermark नहीं डालता। वह AI प्रदाता की ज़िम्मेदारी है और कोई publishing plugin वह कर ही नहीं सकता।
यह आपके लिए तय नहीं करता कि कानूनी रूप से कौन-सी इमेज दायरे में हैं। यह तंत्र देता है; वर्गीकरण का फ़ैसला आपका है (ऊपर दिया टेस्ट देखिए)।
कोई plugin किसी को "compliant" नहीं बना सकता— compliance एक प्रक्रिया है, चेकबॉक्स नहीं। यह उसका लेबलिंग वाला हिस्सा अच्छे से संभालता है।
इंस्टॉल कैसे करें
ZIP डाउनलोड कीजिए: https://github.com/IbramDawwaGmbH/KI-Transparenz-EU— कोड सार्वजनिक है, पहले पढ़ना चाहें तो GitHub पर देखिए
WordPress में: Plugins → Add New → Upload Plugin → Activate
Media में जाइए, अपनी AI इमेज select कीजिए, और लेबल लगा दीजिए
आधिकारिक directory से इंस्टॉल करना पसंद करेंगे? मंज़ूरी मिलते ही हम इस लेख में आधिकारिक लिंक जोड़ देंगे — आप WordPress.org डेवलपर प्रोफ़ाइल भी फ़ॉलो कर सकते हैं। Shopify और Wix वर्ज़न भी अभी विकास में हैं।
WordPress पर नहीं हैं?
शर्त वही रहती है; सिर्फ़ तरीक़ा बदलता है।
Shopify / WooCommerce / अन्य ecommerce— ज़्यादातर themes में caption फ़ील्ड या image overlay जोड़ा जा सकता है। AI से बनी या भारी बदली गई प्रोडक्ट इमेज दायरे के सबसे स्पष्ट मामलों में है, तो वहीं से शुरू कीजिए।
Webflow, Squarespace, Wix— AI इमेज के नीचे caption element जोड़िए, या अपने image component में एक छोटा स्थायी badge रखिए ताकि वह डिफ़ॉल्ट रूप से लगे।
कस्टम साइट्स— component स्तर पर हल कीजिए: image data model में
isAIGeneratedफ़्लैग जोड़िए और component से लेबल render कीजिए। एक बार कीजिए, हर भावी इमेज को विरासत में मिलेगा। Agencies के लिए यह सबसे किफ़ायती रास्ता है — एक बार अपने boilerplate में डाल दिया, हर क्लाइंट प्रोजेक्ट में मुफ़्त।सोशल मीडिया— बड़े प्लेटफ़ॉर्म पर अब AI-content declaration का अपना toggle है। उसे इस्तेमाल कीजिए; आपकी साइट का लेबल दोबारा अपलोड की गई फ़ाइल के साथ नहीं जाता।
डिजिटल मेन्यू— अगर मेन्यू साइट से अलग टूल पर है, तो लेबल वहाँ भी चाहिए, और हर उस भाषा में जिसमें मेन्यू अनुवादित होता है।
पाँच ग़लतियाँ जिनसे बचें
1. यह मान लेना कि आपको machine-readable watermark लगाना है। आप लगा नहीं सकते, और लगाना है भी नहीं। वह प्रदाता का कर्तव्य है। आपका कर्तव्य दिखने वाला लेबल है।
2. यह मान लेना कि हर AI इमेज पर लेबल चाहिए। साफ़ तौर पर काल्पनिक या स्पष्ट रूप से illustrative इमेज आम तौर पर deepfake की परिभाषा से बाहर रहती हैं। डर के मारे सब पर लेबल चिपकाने के बजाय टेस्ट लगाइए — हालाँकि सरलता के लिए सब पर लगाना अनुमत है।
3. डिस्क्लोज़र को terms पेज में छिपा देना। लेबल वहीं दिखना चाहिए जहाँ व्यक्ति इमेज से मिलता है, बिना किसी detection टूल के।
4. यह सोचना कि भारत में हैं इसलिए लागू नहीं होता। अगर AI सिस्टम का आउटपुट EU में इस्तेमाल होता है, तो आप दायरे में हो सकते हैं। पता कसौटी नहीं है।
5. लेबल लगाकर भूल जाना। नई AI इमेज हर हफ़्ते पब्लिश होती हैं। लेबल को अपने publishing workflow का हिस्सा बनाइए, एक-बार की सफ़ाई नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मेरी कंपनी भारत में है। क्या EU AI कानून मुझ पर लागू होता है? हो सकता है। यह विनियमन EU के बाहर स्थापित प्रदाताओं और डिप्लॉयर्स तक पहुँचता है जब AI सिस्टम से निकला आउटपुट संघ के भीतर इस्तेमाल होता है। यूरोपीय ग्राहकों को सर्व करती वेबसाइट, EU में निर्यात करता स्टोर, या यूरोपीय ब्रांड के लिए creatives बनाती agency — सब इस बातचीत में आते हैं। पूरी तरह घरेलू कारोबार, जिसका कोई यूरोपीय दर्शक नहीं, उसका व्यावहारिक जोखिम कम है।
क्या यह कानून मुझे अपनी साइट पर AI जनित छवियों को लेबल करने के लिए बाध्य करता है? अगर इमेज कानून की "deepfake" परिभाषा पर खरी उतरती है — AI जनित या AI से परिवर्तित सामग्री जो किसी यथार्थवादी रूप से संभाव्य व्यक्ति, वस्तु, स्थान या घटना से मिलती-जुलती हो और प्रामाणिक लग सकती हो — तो हाँ, डिप्लॉयर के रूप में आपको यह ज़ाहिर करना होगा कि वह कृत्रिम रूप से जनित है। डिस्क्लोज़र बिना detection टूल के किसी व्यक्ति को दिखना चाहिए। स्पष्ट रूप से काल्पनिक या साफ़ illustrative इमेज आम तौर पर कवर नहीं होतीं।
यह कब से लागू है?2 अगस्त 2026 से। एक अलग छूट 2 दिसंबर 2026 तक है, जो उन generative AI सिस्टम की machine-readable marking से जुड़ी है जो उस तारीख़ से पहले ही बाज़ार में थे — लेकिन वह AI प्रदाताओं का मामला है, इमेज पब्लिश करने वाले व्यवसायों का नहीं।
प्रदाता और डिप्लॉयर में फ़र्क़ क्या है? प्रदाता (provider) वह है जो AI टूल बनाता है और बाज़ार में रखता है — उसे आउटपुट पर machine-readable निशान लगाना है। डिप्लॉयर / उपयोगकर्ता व्यवसाय वह है जो उस टूल को अपने कारोबार में लगाकर नतीजा पब्लिश करता है — उसे deepfake वाली इमेज पर दिखने वाला लेबल लगाना है। दो अलग कर्तव्य, दो अलग पक्ष।
हमारी agency इमेज बनाती है और क्लाइंट पब्लिश करता है। लेबल किसका काम है? दिखने वाले डिस्क्लोज़र का कर्तव्य उस पर पड़ता है जो अपने व्यावसायिक संदर्भ में कंटेंट पब्लिश करता है — यानी सामान्यतः क्लाइंट, जब इमेज उसकी साइट पर उसके नियंत्रण में छपती है। लेकिन व्यवहार में इसे प्रक्रिया से हल कीजिए: agency delivery के साथ बताए कि कौन-सी फ़ाइलें AI से बनी हैं, और पब्लिश करने वाला लेबल लगाए। अगर agency ही क्लाइंट की साइट संभालती है, तो लेबल लगाना उसके workflow में आ जाता है। इसे अनुबंध और delivery checklist में लिख लीजिए।
क्या मुझे अपनी AI इमेज पर watermark लगाना होगा? नहीं। Machine-readable marking उस AI सिस्टम के प्रदाता का दायित्व है जिसने सामग्री बनाई। इमेज पब्लिश करने वाले व्यवसाय के रूप में आपका दायित्व दिखने वाला, इंसान द्वारा पढ़ा जा सकने वाला डिस्क्लोज़र है।
क्या AI से बनी प्रोडक्ट फ़ोटो deepfake है? हो सकती है। परिभाषा यथार्थवादी रूप से संभाव्य वस्तुओं और स्थानों को भी कवर करती है, सिर्फ़ लोगों को नहीं, और धोखे की मंशा ज़रूरी नहीं है। एक photorealistic AI प्रोडक्ट या परिसर की इमेज, जिसे विज़िटर कैमरे से खींची हुई मानेगा, आम तौर पर दायरे में आती है।
जुर्माना कितना है? अनुच्छेद 50 की पारदर्शिता शर्तों के उल्लंघन पर अधिकतम €1.5 करोड़ (15 million euro) या वैश्विक वार्षिक कारोबार का 3%, जो भी अधिक हो, तक जुर्माना लग सकता है — SMEs के लिए आनुपातिकता का ध्यान रखते हुए। प्रवर्तन सदस्य देशों की राष्ट्रीय बाज़ार निगरानी प्राधिकरणों के ज़रिए होता है।
क्या AI से लिखे टेक्स्ट पर भी लेबल चाहिए? सिर्फ़ तब, जब वह सार्वजनिक हित के विषयों पर जनता को सूचित करने के लिए प्रकाशित हो और किसी इंसान ने उसकी संपादकीय ज़िम्मेदारी न ली हो। सामान्य marketing copy निशाना नहीं है।
क्या कोई plugin मुझे "compliant" बना देता है? कोई टूल यह नहीं कर सकता। Plugin दिखने वाले लेबल भरोसे से और पैमाने पर लगाता है, जो यांत्रिक हिस्सा है। कौन-सी इमेज दायरे में हैं यह तय करना, और आगे पब्लिश करते हुए यह अभ्यास बनाए रखना — बाक़ी सब वही है।
भारत के अपने AI नियमों का क्या? भारत AI को लेकर अपना ढाँचा विकसित कर रहा है, और वह अलग विषय है। यह लेख जानबूझकर केवल यूरोपीय नियम पर केंद्रित है, क्योंकि वही वह नियम है जो यूरोपीय दर्शकों तक पहुँचने वाले भारतीय कारोबारों पर आज लागू हो सकता है।
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स्रोत: Article 50, EU AI Act · European Commission FAQ on Article 50 transparency obligations · Commission guidelines on transparency of AI-generated content · Code of Practice on Transparency of AI-generated Content · Article 99, penalties · C2PA. विनियमन का कोई आधिकारिक हिन्दी संस्करण नहीं है; पूरा पाठ EU की सभी आधिकारिक भाषाओं में EUR-Lex पर उपलब्ध है। अंतिम समीक्षा: 7 अगस्त 2026.